नमस्कार किसान भाइयो मै आपका मित्र भानु सोलंकी आज आपको धान की फसल की पूरी जानकारी देने वाला हूँ क्योकि धान की रोपायी लगभग पूरी हो चुकी है ,इसलिए अब उवर्रक डालने का समय चल रहा है |
इस पोस्ट के अंदर आपको खाद के बारे में,बीच से सम्बंधित, धान की फसल में आने वाली बीमारियों के बारे में और उनके निवारण बताऊंगा,इसीलिए आप से निवेदन है कि पोस्ट को पूरा पढ़िए और ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिये |
धान
खरीफ फसलों में धान देश की प्रमुख फसल है। देश में गत 5 वर्षों में धान के अन्तर्गत क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता के आंकड़े काफी अच्छे हैं जिससे स्पष्ट है कि देश में चावल की औसत उपज में वृद्धि हो रही है इसकी उत्पादकता बढ़ाने की काफी सम्भावना है। यह तभी सम्भव हो सकता है जब सघन विधियों को ठीक प्रकार से अपनाया जाय। धान की अधिक पैदावार प्राप्त करने हेतु निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।
- स्थानीय परिस्थितियों जैसे क्षेत्रीय जलवायु, मिट्टी, सिंचाई साधन, जल भराव तथा बुवाई एवं रोपाई की अनुकूलता के अनुसार ही धान की संस्तुत प्रजातियों का चयन करें।
- शुद्ध प्रमाणित एवं शोधित बीज बोयें।
- मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों, हरी खाद एवं जैविक खाद का समय से एवं संस्तुत मात्रा में प्रयोग करें।
- उपलब्ध सिंचन क्षमता का पूरा उपयोग कर समय से बुवाई/रोपाई करायें।
- पौधों की संख्या प्रति इकाई क्षेत्र सुनिश्चित की जाय।
- कीट रोग एवं खरपतवार नियंत्रण किया जाये।
- कम उर्वरक दे पाने की स्थिति में भी उर्वरकों का अनुपात 2:1:1 ही रखा जाय।
गर्मी की जुताई करने के बाद 2-3 जुताइयां करके खेत की तैयारी करनी चाहिए। साथ ही खेत की मजबूत मेड़बन्दी भी कर देनी चाहिए ताकि खेत में वर्षा का पानी अधिक समय तक संचित किया जा सके।
। अगर हरी खाद के रूप में ढैंचा/सनई ली जा रही है तो इसकी बुवाई के साथ ही फास्फोरस का प्रयोग भी कर लिया जाय। धान की बुवाई/रोपाई के लिए एक सप्ताह पूर्व खेत की सिंचाई कर दें, जिससे कि खरपतवार उग आवे, इसके पश्चात् बुवाई/रोपाई के समय खेत में पानी भरकर जुताई कर दें।
प्रजातियों का चयन
उर्वरकों का संतुलित प्रयोग एवं विधि
समय से रोपाई
धान के प्रमुख कीट
धान के प्रमुख रोग: सफेदा रोग,खैरा रोग,भूरा धब्बा इत्यादि


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